पारंपरिक रास्तों को रोकना गैर कानूनी, भूमि मालिक भी बंद नहीं कर सकते: हाईकोर्ट

शिमला:-  हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक फैसले में स्पष्ट किया है कि गांवों में लंबे समय से उपयोग किए जा रहे पारंपरिक और सार्वजनिक रास्तों को कोई भी व्यक्ति बंद नहीं कर सकता है, फिर चाहे वह रास्ता उसकी निजी जमीन से होकर गुजरता हो।

ऐसे मामलों में एसडीएम को हस्तक्षेप एवं तत्काल कार्रवाई का अधिकार

अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में एसडीएम को हस्तक्षेप और तत्काल कार्रवाई का अधिकार है। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने एसडीएम कल्पा के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें याचिकाकर्ताओं को पारंपरिक रास्ते से अवरोध हटाने के निर्देश दिए थे।

 

कोर्ट ने कहा कि जब किसी रास्ते के उपयोग को लेकर विवाद से शांति भंग होने की आशंका हो और ग्रामीणों का उस रास्ते पर लंबे समय से स्थापित उपयोग का अधिकार हो, तब दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 147 के तहत एसडीएम कार्रवाई कर सकते हैं।

स्थानीय प्रथागत कानूनों (वाजिब-उल-अर्ज) के तहत मान्यता प्राप्त रास्तों को भू-स्वामी भी बंद नहीं कर सकता

यह मामला किन्नौर की सांगला तहसील के बटसेरी गांव का है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ताओं ने खसरा नंबर 720 में एक पारंपरिक रास्ते को बंद कर दिया है, जिसका उपयोग ग्रामीण पिछले 70-80 वर्षों से खेतों, घरों, श्मशान घाट और स्थानीय देवता की पालकी ले जाने के लिए करते आ रहे हैं।

 

पुलिस जांच में पाया गया कि रास्ता बंद रहने से क्षेत्र में शांति भंग होने की संभावना है। मामला एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

 

तहसीलदार की रिपोर्ट और स्थानीय गवाहों के बयान के आधार पर एसडीएम ने जून 2023 में रास्ते से अवरोध हटाने का आदेश दिया था। इसी आदेश को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

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