



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- जहां आज के दौर में अधिकांश लोग अपने स्वार्थ तक सीमित होते जा रहे हैं, वहीं हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत वलोह के गांव वलोह की बेटी ललिता जासवाल मानवता, सेवा और समर्पण की एक प्रेरणादायक मिसाल बनकर समाज के सामने उभरी हैं।

जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा और बेटियों के सम्मान के लिए बढ़ाया सहयोग का हाथ




श्रेष्ठा कुमारी मेमोरियल ट्रस्ट की अध्यक्ष ललिता जासवाल ने गरीब एवं जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा को अपना मिशन बनाकर समाज सेवा की एक अनूठी कहानी लिखी है।







सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि श्रेष्ठा कुमारी मेमोरियल ट्रस्ट पिछले 38 वर्षों से बिना किसी सरकारी सहायता के निरंतर समाज सेवा के कार्यों में जुटा हुआ है।



ट्रस्ट की अध्यक्ष ललिता जासवाल अपने आसपास के विद्यालयों में जाकर जरूरतमंद विद्यार्थियों की सहायता करना कभी नहीं भूलतीं। उनका कहना है कि, “यह केवल एक ट्रस्ट नहीं, बल्कि मेरे स्वर्गीय पिता का सपना है और जब तक मुझमें सामर्थ्य है, मैं इस सपने को जीवित रखने का प्रयास करती रहूंगी।”




‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की भावना को धरातल पर उतारते हुए ललिता जासवाल ने राजकीय उच्च विद्यालय वलोह में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मेधावी छात्राओं को प्रोत्साहन राशि प्रदान की। छठी कक्षा की दुर्गा, सातवीं कक्षा की परी, आठवीं कक्षा का नक्श, नौवीं कक्षा की रिद्धिमा तथा दसवीं कक्षा की सिया को ₹1200-₹1200 की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया।



इसके अतिरिक्त विद्यालय के जरूरतमंद विद्यार्थियों सूर्यांश, कार्तिकेय, शैलजा, निशांत और अरुण कुमार को जूते भी वितरित किए गए। इस सहयोग से बच्चों में उत्साह का माहौल देखने को मिला तथा उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली। विद्यार्थियों एवं अभिभावकों ने ट्रस्ट और ललिता जासवाल का हृदय से आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर विद्यालय के मुख्याध्यापक सुनील कुमार, अध्यापिका पूजा शर्मा, वंदना, सुनीता, आशा, रविंद्र तथा दीपक सहित विद्यालय का समस्त स्टाफ उपस्थित रहा।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज जब कई स्थानों पर बच्चे अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्यों को भूलते जा रहे हैं, ऐसे समय में ललिता जासवाल अपने स्वर्गीय पिता स्वर्गीय शूरवीर सिंह के सपनों को साकार कर समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि बेटियां केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का गौरव होती हैं।
ललिता जासवाल का यह सेवा भाव समाज को यह संदेश देता है कि सच्ची सेवा वही है जो बिना किसी स्वार्थ, प्रचार और पहचान की अपेक्षा के की जाए। उनकी यह पहल न केवल जरूरतमंद बच्चों के जीवन में नई आशा जगा रही है, बल्कि समाज में शिक्षा, संस्कार और मानवता की अलख भी जगा रही है।


















