



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के पूर्व वाइस चेयरमैन नवीन शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार द्वारा कृषि एवं बागवानी उपज विपणन (APMC) समितियों के गैर-सरकारी अध्यक्षों के मासिक मानदेय को ₹24,000 से बढ़ाकर सीधे ₹60,000 (ढाई गुना वृद्धि) करने के जनविरोधी और वित्तीय रूप से गैर-जिम्मेदाराना प्रस्ताव की हम कड़ी निंदा करते हैं।

आर्थिक तंगी से जूझ रहे हिमाचल में जनता पर बोझ, चहेतों पर मेहरबानी: APMC अध्यक्षों का मानदेय ₹24,000 से बढ़ाकर ₹60,000 करना सुक्खू सरकार का जनविरोधी कदम : नवीन शर्मा।



नवीन शर्मा ने कहा कि प्रदेश की जनता इस समय भारी वित्तीय संकट, महंगाई और बेरोजगारी का सामना कर रही है, कर्मचारियों को तनख्वाह व पेंशन देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं वहीं दूसरी ओर सरकार अपने राजनीतिक चहेतों को रेवड़ियाँ बांटने में व्यस्त है।






नवीन शर्मा ने कहा कि सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश राज्य के खजाने पर डाका डालने जैसा काम किया है। राज्य पहले से ही भारी कर्ज के नीचे दबा हुआ है और कर्मचारियों को वेतन व एरियर देने के लाले पड़े हैं, ऐसे में मानदेय को सीधे ढाई गुना बढ़ाना वित्तीय दिवालियेपन को दर्शाता है।


किसानों और बागवानों के साथ धोखा प्रदेश सरकार के रही है और प्रदेश के किसानों को उनकी फसलों और फलों का सही दाम नहीं मिल पा रहा है, लेकिन उनके नाम पर बनी मंडियों के राजनीतिक आकाओं की जेबें भरने के लिए सरकारी खजाना खोल दिया गया है।



मुख्यमंत्री ‘व्यवस्था परिवर्तन’ और वित्तीय अनुशासन की बातें करते हैं, मगर हकीकत में आम जनता की स्वास्थ्य योजनाओं (जैसे हिमकेयर) और जनहित के बजटों पर कैंची चलाकर राजनीतिक नियुक्तियों को ऐश-ओ-आराम दिया जा रहा है। नवीन शर्मा ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए लाए गए इस फिजूलखर्ची के


जनविरोधी फैसले को सरकार को जनहित में तुरंत वापिस लेना चाहिए ।


















