‘स्वतंत्रता आंदोलन के सशक्त प्रहरी और हिमाचली अस्मिता के प्रतीक थे पहाड़ी गांधी’

हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:-  स्वतंत्रता सेनानी एवं हिमाचल प्रदेश के साहित्यकार पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम की जयंती के उपलक्ष्य पर शनिवार को यहां सलासी स्थित जिला भाषा अधिकारी कार्यालय एवं संस्कृति सदन में राज्य स्तरीय साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम की जयंती पर हमीरपुर में जुटे हिमाचल के साहित्यकार
हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी, शिमला के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश भर के साहित्यकारों, कवियों एवं साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम में उपायुक्त हमीरपुर के सहायक आयुक्त चिराग शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
राज्य स्तरीय साहित्यिक सम्मेलन में कई साहित्यकारों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र और रचनाएं
इस अवसर पर पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम को श्रद्धांजलि देते हुए चिराग शर्मा ने कहा कि बाबा कांशी राम केवल एक महान कवि ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के सशक्त प्रहरी और हिमाचली अस्मिता के प्रतीक थे।
सहायक आयुक्त ने सभी लोगों और विशेषकर युवाओं से बाबा कांशी राम के साहित्य एवं आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपील की।
इससे पहले, हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी की सहायक सचिव डॉ. श्यामा वर्मा और जिला भाषा अधिकारी संतोष कुमार पटियाल ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, अन्य अतिथियों, सभी साहित्यकारों, कवियों और श्रोताओं का स्वागत किया तथा स्वतंत्रता आंदोलन में साहित्य में पहाड़ी गांधी बाबा कांशी राम के योगदान का स्मरण किया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में बाबा कांशी राम के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आयोजित लेखक संगोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार प्रभात शर्मा ने ‘बाबा कांशी राम जी की रचनाओं में राष्ट्रीय चिंतन’ विषय पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया।
डॉ. रेखा वशिष्ठ, डॉ. राजेंद्र राजन, मदन हिमाचली, रमेश चंद्र मस्ताना और अन्य साहित्यकारों ने परिचर्चा में भाग लेते हुए कहा कि बाबा कांशी राम का साहित्य आज भी समाज को राष्ट्रभक्ति, सामाजिक समरसता और मातृभाषा के संरक्षण की प्रेरणा देता है।
इस सत्र के विशिष्ट अतिथि द्विजेंद्र द्विज ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है तथा बाबा कांशी राम की रचनाएं आज भी जनमानस में राष्ट्रीय चेतना का संचार करती हैं।
सत्र की अध्यक्षता डॉ. रेखा वशिष्ठ ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हिमाचल कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी तथा भाषा एवं संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम प्रदेश की समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्द्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मंच संचालन मदन हिमाचली ने किया।
द्वितीय सत्र में डॉ. राजेंद्र राजन की अध्यक्षता में आयोजित कवि सम्मेलन में हिमाचल के प्रसिद्ध रचनाकारों द्विजेंद्र द्विज, ओम प्रकाश, डॉ. कौशल्य ठाकुर, केहर सिंह मित्र, केसर सिंह पटियाल, देश राज, रवि दत्त, दलीप सिंह, होशियार सिंह, रत्न चंद रत्नाकर, कमलेश कुमारी, डॉ. पिंकी देवी, अशोक कुमार सोनी, डॉ. सुशीला गौतम, रजनी बाला, मनसा पंडित, अशोक कुमार कालिया, डॉ. रजनी कांत, डॉ. सूरत ठाकुर, संदेश शर्मा, डॉ. अनीता शर्मा, ललिता कश्यप, प्रकाश चंद धीमान, अपर्णा धीमान, डॉ. यादव किशोर गौतम, शीला देवी, राकेश ठाकुर, नीलम कुमारी आदि कवियों-कवत्रियों ने अपनी मौलिक रचनाओं का प्रभावशाली काव्य-पाठ किया। इस सत्र में दलीप सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि मंच संचालक की भूमिका रमेश चंद्र मस्ताना ने निभाई।
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