प्रदेश के ट्राइबल इलाकों में विकास की रफ्तार, सरकार ने खोला योजनाओं का पिटारा

शिमला:-  प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की तस्वीर अब तेजी से बदलती नजर आ रही है। एक समय में जिन इलाकों तक कभी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती माना जाता था, वहां अब शिक्षा, स्वास्थ्य, डिजिटल कनेक्टिविटी, पर्यटन, महिला सशक्तिकरण और रोजगार के नए अवसरों का विस्तार हो रहा है।

 

प्रदेश सरकार का दावा है कि लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर जैसे दुर्गम क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए बड़े पैमाने पर योजनाएं लागू की जा रही हैं।

 

हिमाचल सरकार का दावा है कि लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर जैसे जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, डिजिटल कनेक्टिविटी, पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है।

 

सरकार विकास योजनाओं के कुल बजट का 9 प्रतिशत हिस्सा ट्राइबल सब-प्लान (STP) के तहत खर्च कर रही है, जिससे दूरदराज के इलाकों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

 

शिक्षा के क्षेत्र में हजारों विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक उपकरणों और नए संस्थानों से मजबूत किया गया है।

 

रोजगार और महिला सशक्तिकरण के तहत 577 युवाओं को रोजगार या स्वरोजगार मिला है और 3,234 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। वहीं, 705 ग्राम पंचायतों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़कर ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, बैंकिंग और टेलीमेडिसिन जैसी सुविधाएं गांवों तक पहुंचाई गई हैं।

 

सरकार का कहना है कि विकास के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और पर्यावरण संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है, ताकि इन दुर्गम क्षेत्रों के लोगों का जीवन स्तर लगातार बेहतर हो सके।

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