



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कहा है कि कांग्रेस ने पहले पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के नाम पर वोट लूटकर महिलाओं को ठगा और अब खुद इंदिरा गांधी को ही भूल गई है।

10 गारंटियां छोड़िए, ओपीएस और इंदिरा गांधी प्यारी बहना सम्मान योजना पर ही श्वेत पत्र जारी कर दे सरकार




अपनी नेता के नाम पर वोट लेकर जनता से धोखा करना उन्हें अपमानित करना है। जारी प्रेस विज्ञप्ति में राजेंद्र राणा ने तथ्यों के साथ कांग्रेस की पोल खोलते हुए कहा कि सरकार कर्मचारियों को ओपीएस और महिलाओं को 1500 रुपये देने की झूठी वाहवाही लूट रही है।






अगर इसमें सच्चाई है तो प्रदेश सरकार श्वेत पत्र जारी करने से क्यों घबरा रही है। उन्होंने कहा कि हकीकत यह है कि ओपीएस कर्ज लेकर आधी-अधूरी दी जा रही है।



सरकार के अपने वित्त विभाग ने 8 फरवरी, 2026 को लिखित में कहा था कि खजाना खाली है और यूपीएस अपनाओ, अन्यथा 1800 करोड़ की उधारी पर केंद्र रोक लगा देगा। प्रदेश के पास संसाधन 18 हजार करोड़ के हैं और खर्चा 48 हजार करोड़ का है।





17 निगमों-बोर्डों के 6500 सेवानिवृत्त कर्मचारी आज भी इस लाभ से वंचित हैं। राणा ने कहा कि दूसरा सच 1500 रुपए का है। योजना का नाम इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि है।


कांग्रेस ने इसी नाम पर वोट मांगा था, लेकिन सत्ता में आने के 2 साल बाद यह योजना शुरू हुई। मार्च, 2024 से अब तक 7,88,784 बहनों ने आवेदन किया। सरकार के अपने आंकड़ों के अनुसार सिर्फ 28,249 बहनों को ही पैसा मिला है और 2,384 आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए हैं।
हमीरपुर में भी 2.41 लाख आवेदन वेरिफाई हुए, पर लाभ गिनी-चुनी महिलाओं को ही मिला। 90 प्रतिशत बहनें शर्तों के जाल में बाहर हैं। 1500 रुपए सिर्फ कागज पर घूम रहे हैं। कांग्रेस का नारा था गरीबी हटाओ, लेकिन सुक्खू सरकार ने गरीब बहनों को ही योजना से हटा दिया।
इंदिरा गांधी के नाम पर वोट लूटकर महिलाओं से धोखा करने वालों ने अपनी नेता को ही भुला दिया। उन्होंने कहा कि 10 में से बाकी गारंटियों की तो सरकार खुद अब बात नहीं कर रही है। सरकार के विजन में न उद्योग है और न ही रोजगार, जिनकी वर्तमान में सबसे ज्यादा जरूरत है।
विधानसभा में उद्योग मंत्री ने खुद माना है कि अगस्त, 2022 से जुलाई, 2025 तक 115 औद्योगिक इकाइयां बंद हुई हैं और हजारों युवा बेरोजगार हुए हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसी बड़ी कंपनी बद्दी छोड़ गई है। बद्दी-नालागढ़ इंडस्ट्री एसोसिएशन भी नाराज है।

जबकि पूर्व जयराम सरकार में 2017 से 2022 तक हिमाचल ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में पहाड़ी राज्यों में नंबर वन बना था। केंद्र से हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट आए। नालागढ़ में मेडिकल डिवाइस पार्क और ऊना में बल्क ड्रग पार्क को मंजूरी मिली।
उद्योगों को बिजली ड्यूटी में छूट मिली थी। तब पलायन नहीं, निवेश आता था। राणा ने कहा कि आज हिमाचल में जो भी विकास दिख रहा है, वह केंद्र सरकार की स्कीमों से चल रहा है। नेशनल हाईवे फोरलेन, पीएमजीएसवाई, जल जीवन मिशन, पीएम आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्मार्ट सिटी, रेल लाइन, एम्स बिलासपुर, आईआईटी मंडी, ट्रिपल आईटी ऊना, सब केंद्र के बजट से चल रहा है। प्रदेश सरकार की अपनी गारंटियों के लिए ही खजाना खाली है, फिर सरकार किस विकास का दावा कर रही है।
उन्होंने कहा कि सशक्त हिमाचल, जनहित के मुद्दों पर मुखर और विकास की पैरवी करने वाली भाजपा हमेशा लोगों के लिए खड़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार के गलत फैसलों और नीतियों का विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है और जनसेवा करना हमारा धर्म है।
इसी सोच के साथ जनता भी भाजपा का समर्थन कर रही है, लेकिन कांग्रेस मुद्दाविहीन होकर सत्ता में होते हुए भी अपनी गारंटियों की नाकामी पर केंद्र सरकार और भाजपा को कोस रही है, जबकि हकीकत यह है कि कांग्रेस सरकार को भी पता है कि गारंटियों के नाम पर जनता को ठगा गया है और बाकी विकास केंद्र के सहारे ही हो रहा है, जिसमें प्रदेश सरकार का कोई योगदान नहीं है।




