



हमीरपुर/विवेकानंद वशिष्ठ:- प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने कहा है कि आपदा के नाम पर आए पैसे का क्या हुआ, इसका जवाब मुख्यमंत्री को हिमाचल की जनता को देना पड़ेगा।

केंद्र से मिले आपदा के बजट को लेकर भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने घेरी कांग्रेस सरकार



उन्होंने कहा कि केंद्र ने दिल खोलकर पैसा दिया, लेकिन प्रदेश में वह पैसा सड़कों पर नहीं, फाइलों में घूम रहा है और यह कोई आरोप नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार के कागज ही ऐसे तथ्य दे रहे है।






जारी प्रेस विज्ञप्ति में राजेंद्र राणा ने तथ्यों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने 18 जून, 2025 को हिमाचल की 2023 आपदा के लिए 2006.40 करोड़ की रिकंस्ट्रक्शन योजना मंजूर की। इसमें 1504.80 करोड़ केंद्र का हिस्सा है। पहली किश्त के 451.44 करोड़ भी जारी हो गए।



उसके बाद 13 जनवरी, 2026 को राज्य सरकार ने खुद आदेश निकाल कर दूसरी किश्त में 753.29 करोड़ बांटे। इसमें अकेले पीडब्ल्यूडी को 487.80 करोड़ दिए गए। जल शक्ति विभाग को 176.48 करोड़ तथा कृषि को 29.13 करोड़ मिले।





उन्होंने सवाल पूछा कि जब पीडब्ल्यूडी को पौने 500 करोड़ सिर्फ सड़कों-पुलों के लिए मिले, तो आज सड़कें गड्ढों में क्यों हैं? अगस्त, 2026 में 259 सड़कें बंद तथा सितंबर में ठियोग से लेकर पूह तक एनएच-5 जाम लग रहा है, तो ये किस विकास का सर्टिफिकेट है?


राजेंद्र राणा ने कहा कि सबसे बड़ा घोटाला नियम में ही लिखा है। सरकार के अपने 13 जनवरी वाले आदेश में साफ लिखा है कि पैसा सिर्फ वर्ष 2023 में टूटी स्वीकृत संपत्तियों पर लगेगा।
बाहर खर्च हुआ तो जिम्मेदारी अधिकारी की होगी और मार्च 2026 तक यूसी देना होगा। उन्होंने सवाल किया कि क्या हर टेंडर से पहले मौके पर जाकर नुकसान वेरिफाई हुआ? जिन जगह स्लिप हुई ही नहीं, वहां कागजों में स्लिप दिखाकर टेंडर कैसे बन गए? मार्च,2026 की डेडलाइन निकल गई, कितने काम पूरे हुए और कितने के सिर्फ बिल पूरे हुए? उन्होंने कहा कि यह आरोप नहीं, गांव-गांव से आ रही शिकायत है कि काम आधा और भुगतान पूरा हुआ।
यह आपदा पीड़ितों के जख्मों पर पैसा कमाने जैसा है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि पीडीएनए के तहत हुए हर टेंडर की जियो-टैगिंग के साथ फिजिकल वेरिफिकेशन हो। सभी 68 विधानसभाओं का पैसा, काम, ठेकेदार और भुगतान की लिस्ट वेबसाइट पर डाली जाए।
विधानसभा में श्वेतपत्र लाएं कि 2006 करोड़ में से धरातल पर कितना लगा। उन्होंने कहा कि आपदा का पैसा सेवा के लिए है, कमीशन नहीं है। अगर इसमें भी खेल हुआ है तो चाहे अधिकारी हो या संरक्षण प्राप्त ठेकेदार, किसी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।





