नम आंखों से विदा हुआ माँ का दूत, सदियों पुरानी परंपरा फिर हुई जीवंत
उत्तराखंड/विवेकानंद वशिष्ठ:- हिमालय के उत्तुंग शिखरों पर जब 280 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक ‘नन्दा राजजात’ की पदचाप शांत हो जाती है, तब भी त्रिशूल और नन्दा घुंघटी की बर्फीली हवाओं में एक मर्मस्पर्शी सन्नाटा तैरता रहता है। कैलाश की ओर अकेला चला, माँ नंदा का चौसिंगा दूत शंखों की गूँज, ढोल-दमाऊँ की थाप और लाखों श्रद्धालुओं … Read more